🌿 छत्तीसगढ़ में जनजातियाँ: इतिहास, विशेषताएँ और आँकड़े
छत्तीसगढ़ भारत का एक ऐसा राज्य है, जहाँ की एक-तिहाई से अधिक जनसंख्या अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes) से संबंधित है। यह राज्य जनजातीय संस्कृति, परंपराओं, और प्राकृतिक जीवनशैली के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है।
📊 जनसंख्या आँकड़े
- 2011 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजातियों की कुल जनसंख्या: 78,22,902
- यह राज्य की कुल जनसंख्या का 30.62% है।
- जबकि 2001 की जनगणना में यह आँकड़ा 31.8% था।
- इस प्रकार, 2011 में जनजातीय जनसंख्या के प्रतिशत में कुछ गिरावट दर्ज की गई।
📌 छत्तीसगढ़ का जनजातीय स्थिति में स्थान
- कुल जनसंख्या के आधार पर अनुसूचित जनजातियों की संख्या में छत्तीसगढ़ भारत में छठे स्थान पर है: (मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, गुजरात, झारखंड के बाद)
- प्रतिशत के आधार पर छत्तीसगढ़ मिजोरम, नागालैंड, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश के बाद पाँचवें स्थान पर है।
🧬 छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ
- छत्तीसगढ़ में कुल 42 अनुसूचित जनजातियाँ पाई जाती हैं।
- ये जनजातियाँ कुल 161 उप-जनजातियों में विभाजित हैं।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 के अंतर्गत अनुसूचित जनजातियों की मान्यता दी गई है।
📍 प्रमुख जनजातीय क्षेत्र
- बस्तर को “जनजातियों की भूमि” कहा जाता है।
- जनजातियाँ सामान्यतः वन क्षेत्रों, पर्वतीय अंचलों और सीमावर्ती जिलों में निवास करती हैं।
🌿 प्रमुख जनजातियाँ और उनकी विशेषताएँ
| जनजाति | विशेषता |
|---|---|
| गोंड | सबसे बड़ी जनजाति |
| हल्बा | आर्थिक रूप से सबसे विकसित जनजाति |
| अबुझमाड़िया | सबसे पिछड़ी जनजाति |
| उरांव | सबसे साक्षर जनजाति |
| मुड़िया | सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जनजाति |
🛡️ विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTGs)
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 7 विशेष पिछड़ी जनजातियाँ (PVTGs) हैं:
| जनजाति | प्रमुख जिले |
|---|---|
| बैगा | कबीरधाम, बिलासपुर, कोरिया, राजनांदगांव, मुंगेली |
| पंडो | सूरजपुर, बलरामपुर, सरगुजा |
| कमार | गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद, कांकेर |
| भुंजिया | गरियाबंद, धमतरी |
| बिरहोर | रायगढ़, जशपुर, बिलासपुर, कोरबा |
| अबुझमाड़िया | नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर |
| पहाड़ी कोरवा | सरगुजा, जशपुर, कोरबा, बलरामपुर |
📌 2012 में छत्तीसगढ़ सरकार ने अधिसूचना जारी कर पंडो और भुंजिया को भी इस श्रेणी में जोड़ा, जिससे इनकी कुल संख्या 5 से बढ़कर 7 हो गई।
📚 निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ राज्य की सांस्कृतिक धरोहर, लोक परंपरा, और प्राकृतिक संसाधनों की संरक्षिका हैं। इन जनजातियों का योगदान न केवल सांस्कृतिक विविधता में है, बल्कि इन्होंने राज्य की पर्यावरणीय चेतना, हस्तशिल्प, कृषि और लोकगीतों को भी समृद्ध किया है।
जनजातियाँ छत्तीसगढ़ की आत्मा हैं, और उनका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी।


