🎶 मनमोहनी हे गांव के गोरिया – नितिन दुबे का सुपरहिट छत्तीसगढ़ी गीत
गीत का नाम: मनमोहनी हे गांव के गोरिया
स्वर: नितिन दुबे
गीतकार: बुधराज चौहान
संगीत: नितिन दुबे
म्यूजिक लेबल: नितिन दुबे
शैली: छत्तीसगढ़ी रोमांटिक लोक गीत
भाषा: छत्तीसगढ़ी
✨ गीत का परिचय
“मनमोहनी हे गांव के गोरिया” छत्तीसगढ़ी गायकी का एक लोकप्रिय और मनमोहक गीत है जिसे छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध लोकगायक नितिन दुबे ने अपनी मधुर आवाज़ में प्रस्तुत किया है। इस गीत में गांव की एक सुंदर, चंचल, पढ़ाई करने शहर जा रही लड़की की खूबसूरती और अदाओं का वर्णन किया गया है।
यह गीत छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति, मासूम प्रेम और संगीत की मिठास को जीवंत करता है।
🎵 Manmohni He Gaon Ke Goriya Lyrics in Hindi – मनमोहनी हे गांव के गोरिया
स्थायी (Refrain):
मन मोहनी मोही डारे वो
मन मोहनी हे गांव के गोरिया
हाय पढ़े बर जावत हे शहरिया
मन मोहनी हे गांव के गोरिया
हाय पढ़े बर जावत हे शहरिया
हाय मारे ये ये ये
हाय मारे तिरछी नजरिया
मन मोहनी मोही डारे वो
अंतरा 1:
धर के किताब चले मटक मटक
बड़े लागे सुहाना
धर के किताब चले मटक मटक
बड़े लागे सुहाना
हो मन लुभ गे
हाय चोरी छुप के वो देखे के बहाना
लहरा मारे ये ये ये
लहरा मारे लाल चुनरिया
मन मोहनी अरे तितली
हाय बिजली हे गांव के गोरिया
हाय पढ़े बर जावत हे शहरिया
अंतरा 2:
हाय गली गली महर
चिरई सही चहर वा हा रे गढ़ोइया
गली गली महर
चिरई सही चहर वा हा रे गढ़ोइया
हो बादर गरजे जीव मोर धड़के
मरत हे मरोइया
हाय रिमझे ये ये ये ये
हाय रिमझे हाथ देखोइया
हाय मिरगिन हाय मजुरनिन
अरे बघनीन हे गांव के गोरिया
हाय पढ़े बर जावत हे शहरिया
🌾 गीत की विशेषताएँ
- संस्कृति और सौंदर्य का मेल: यह गीत छत्तीसगढ़ की मिट्टी से जुड़ी सरल प्रेमभावना और स्त्री सौंदर्य का गीतात्मक चित्रण है।
- प्राकृतिक उपमाएं: “चिरई”, “बघनीन”, “तितली”, “बिजली”, “लाल चुनरिया” जैसी उपमाएं इस गीत को और भी सजीव बना देती हैं।
- लोकप्रियता: यह गीत विशेष रूप से युवाओं और ग्रामीण श्रोताओं के बीच बेहद लोकप्रिय रहा है।


