🌾 अरपा पैरी के धार गीत – छत्तीसगढ़ की आत्मा को समर्पित एक मधुर भक्ति लोक गीत
गीत: अरपा पैरी के धार
गायिका: ममता चंद्राकर
गीतकार: डॉ. नरेंद्र देव वर्मा
शैली: छत्तीसगढ़ी लोकगीत
विषय: मातृभूमि छत्तीसगढ़ की महिमा व प्रकृति-प्रेम
📜 गीत का महत्व:
“अरपा पैरी के धार” छत्तीसगढ़ राज्य का एक प्रसिद्ध सांस्कृतिक लोकगीत है, जिसे राज्य की पहचान माना जाता है। इस गीत में छत्तीसगढ़ की नदियाँ, प्रकृति, शहरों, संस्कृति और सौंदर्य का सुंदर वर्णन किया गया है। यह गीत इतना प्रिय है कि इसे छत्तीसगढ़ राज्य गीत के रूप में भी मान्यता प्राप्त है।
🎵 Arpa Pairi Ke Dhaar Lyrics in Hindi – छत्तीसगढ़ी में मूल गीत
स्थायी:
अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार
इन्द्रावती हा पखारे तोर पईया
महूं पांव परौं तोर भुईया
जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मईया
अंतरा 1:
सोहै बिंदिया सही घाटे डोंगरी पहाड़
चंदा सूरज बने तोरे नैना
सोनहा धान के अंग, लुगरा हरियर हे रंग
तोरे बोली हावै सुग्घर मैना
अंचरा तोर डोलावै पुरवइया
महूं पांव परौं तोर भुईया
जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मईया
अंतरा 2:
रायगढ़ हावै सुग्घर तोरे मउरे मुकुट
सरगुजा अउ बिलासपुर हे बइंहा
रायपुर कनिहा, सही घाट सुग्घर फभै
दुर्ग बस्तर सोहै पयजनिया
नांदे गॉंव, नवा करधनिया
महूं पांव परौं तोर भुईया
जय हो जय हो छत्तीसगढ़ मईया
🌍 English Transliteration: Arpa Pairi Ke Dhaar Song Lyrics
Sthayi:
Arpa Pairi ke dhaar, Mahanadi he apaar
Indravati ha pakhare tor paiyaa
Mahoon paanv parau tor bhuiyaa
Jai ho Jai ho Chhattisgarh Maiyaa
Antara 1:
Sohai bindiya sahi ghaate dongari pahaar
Chanda suruj banai tore naina
Sonha dhaan ke ang, lugra hariyar he rang
Tore boli haave suggar maina
Anchra tore dolavai purvaiyaa
Mahoon paanv parau tor bhuiyaa
Jai ho Jai ho Chhattisgarh Maiyaa
Antara 2:
Raigarh haave suggar tore maure mukut
Sarguja au Bilaspur he bainhaa
Raipur kaniha, sahi ghaat suggar phabhai
Durg Bastar sohai payjaniyaa
Naande gaanv, nava kardhaniyaa
Mahoon paanv parau tor bhuiyaa
Jai ho Jai ho Chhattisgarh Maiyaa
🏞️ छत्तीसगढ़ की आत्मा: गीत में छिपा संदेश
यह गीत छत्तीसगढ़ की विविधता, सौंदर्य और मातृभूमि के प्रति अपार श्रद्धा का प्रतीक है।
अरपा, पैरी, इंद्रावती और महानदी जैसी नदियाँ केवल भौगोलिक धाराएँ नहीं, बल्कि इस गीत में भावनाओं की लहरें बन जाती हैं।
रायगढ़ का मुकुट, बस्तर की पायल, बिलासपुर की बांहें – ये सब राज्य के अंग बन कर गीत में प्रकट होते हैं।


