छत्तीसगढ़ में सुशासन की नई सुबह: विष्णु देव साय सरकार के ढाई साल का रिपोर्ट कार्ड
छत्तीसगढ़, जिसे कभी ‘धान का कटोरा’ के रूप में जाना जाता था, आज सुशासन और समावेशी विकास की नई परिभाषा गढ़ रहा है। बीते लगभग ढाई वर्षों में विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने विकास की एक ऐसी रूपरेखा तैयार की है, जो भविष्य के लिए बड़े बदलावों का संकेत दे रही है। यह सरकार ‘सुशासन’ को केवल एक नारा नहीं, बल्कि जमीनी क्रियान्वयन का आधार बना रही है।

किसानों और अन्नदाताओं का सम्मान
छत्तीसगढ़ की पहचान उसके किसानों से है, और इस सरकार ने इस पहचान को विशेष सम्मान दिया है। प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी और 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय करना सिर्फ एक आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि अन्नदाताओं के आत्मविश्वास को मजबूत करने का एक बड़ा कदम है। यह सुनिश्चित करता है कि किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिले, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो सके।
आदिवासी समाज और ‘हरा सोना’ संग्राहकों को सशक्तिकरण
तेंदूपत्ता संग्राहक, जिन्हें ‘हरा सोना’ से जुड़ा श्रमिक वर्ग कहा जाता है, उनके जीवन स्तर को सुधारने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। पारिश्रमिक दर को 5500 रुपये प्रति मानक बोरा तक बढ़ाना और चरण पादुका वितरण जैसी योजनाएं आदिवासी क्षेत्रों में एक बड़ी राहत लेकर आई हैं। ये पहलें न केवल आर्थिक रूप से उन्हें सशक्त करती हैं, बल्कि उनके प्रति सरकार की संवेदनशीलता को भी दर्शाती हैं।
बेघरों को छत और महिलाओं को आर्थिक संबल
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही, सरकार की पहली प्राथमिकता में से एक था लगभग 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति। यह दर्शाता है कि बेघर और जरूरतमंद परिवारों को आश्रय प्रदान करना सुशासन की आधारशिला है।
इसके साथ ही, राज्य सरकार ने 70 लाख से अधिक विवाहित महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1000 रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की पहल की है। यह राशि, भले ही सीमित लगे, ग्रामीण और जरूरतमंद परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक संबल का काम कर रही है, जिससे महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक भागीदारी में वृद्धि हो रही है।
नक्सलवाद पर प्रहार और शांति की ओर कदम
लंबे समय से नक्सलवाद से प्रभावित बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयास सराहनीय रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की रणनीति के तहत 31 मार्च 2026 तक नक्सलमुक्ति का लक्ष्य एक बड़े बदलाव का संकेत है। इससे क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद बढ़ी है, जिससे स्थानीय लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
युवाओं के लिए पारदर्शी अवसर और खेलकूद को बढ़ावा
युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए, विष्णु देव साय सरकार ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग से जुड़े मामलों में जांच सुनिश्चित करके पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को बढ़ावा दिया है। यह सरकार की जवाबदेही और युवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, बस्तर और सरगुजा ओलंपिक जैसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जा रहा है, जिससे खेल के क्षेत्र में भी युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
सुशासन तिहार और ‘डबल इंजन’ सरकार की शक्ति
विगत वर्ष आयोजित ‘सुशासन तिहार’ की सफलता के बाद, इसे इस वर्ष भी 1 मई से 10 जून तक आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य योजनाओं की जमीनी हकीकत को परखना, नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना और प्रशासन को सीधे जनता से जोड़ना है।
श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य के बीच समन्वय को ‘डबल इंजन सरकार’ के रूप में देखा जा रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि इस समन्वय से विकास योजनाओं को तेजी से क्रियान्वित किया जा रहा है, जिसका लाभ प्रदेश के लगभग तीन करोड़ नागरिकों तक पहुंच रहा है।
समावेशी विकास का रोडमैप: ‘बगिया के विष्णु’
‘बगिया के विष्णु’ के रूप में पहचाने जाने वाले मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों, ईब से इंद्रावती तक, विकास का एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। यह समावेशी विकास की अवधारणा को दर्शाता है, जिसका लक्ष्य अंतिम छोर के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।
छत्तीसगढ़ में सुशासन की यह यात्रा अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन इसकी दिशा स्पष्ट है। सरकार की प्राथमिकताओं में किसान, महिला, आदिवासी, युवा और ग्रामीण समाज केंद्र में हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये नीतियां किस तरह स्थायी बदलाव का रूप लेती हैं, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि विकास की यह कहानी छत्तीसगढ़ में गति पकड़ चुकी है।
