लाल ईंट का काला कारोबार, हरे भरे पेड़ पौधों की बली से धधक रहे हैं अवैध ईंट भट्ठे

अनुराग नायक महासमुंद इन दिनों अवैध ईंट भट्ठों का काम अंचल में जोरो से चल रहा है. शहरी इलाके से अधिक आसपास के ग्रामीण इलाकों में बड़ी तादाद में इन अवैध ईंट भट्ठों का संचालन पर्यावरण को क्षति पहुंचा कर किया जा रहा है. ज्यादातर लोग स्वयं के लिये घर बनाने के बहाने बड़े पैमानें पर ईंट भट्ठों का संचालन कर रहे हैं और इसी का आड़ लेकर खुलेआम ईंटों की बिक्री भी की जा रही है, राजनीतिक सरंक्षण के कारण इन्हें प्रशासन की कार्यवाही तक का खौफ नहीं है. एक ओर शासन-प्रशासन लोगों को पेड़ बचाने और लगाने प्रेरित करती हैं जो कथनी करनी में फर्क बताती हैं, कुछ महीने बाद बारिश लगते ही पौधा-रोपण करने का आडम्बरपूरित अभियान महज अखबारों की सुर्खियां बटोरने के लिये फिर से किया जायेगा लेकिन अभी उन जीवित और पर्यावरण संरक्षण में अहम योगदान देने वाले वृक्षों को बचाने कोई पर्यावरण प्रेमी नेता और अफसर सामने नहीं आते हैं. यह विडम्बना ही हैं कि अवैध रूप से ईंट भट्ठों संचालन के लिये बड़ी तादाद में हरे-भरे वृक्षों की अवैध कटाई की जा रही हैं और इस दिशा में कोई सार्थक कार्यवाही नहीं की जा रही.

समय रहते इन अवैध ईंट भट्ठों संचालकों के विरूद्ध कोई बड़ी कार्यवाही नहीं की गई तो ये पर्यावरण को बहुत बड़ी हानि पहुंचा सकते हैं। जिसका जिम्मेदार कौन होगा.।

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