छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन तिहार’ (Good Governance Festival) मुख्य रूप से पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। उनकी जन्मतिथि, 25 दिसंबर, को पूरे देश में ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, जिसे छत्तीसगढ़ सरकार एक उत्सव (तिहार) के रूप में आयोजित करती है।

इस आयोजन के मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं:
1. उद्देश्य
इसका मुख्य उद्देश्य शासन व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देना है। सरकार अपनी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का संकल्प दोहराती है।
2. महत्वपूर्ण घोषणाएँ और लाभ
छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के अवसर पर अक्सर बड़ी योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाता है:
- बोनस वितरण: राज्य सरकार इस दिन किसानों के बैंक खातों में धान की बकाया बोनस राशि हस्तांतरित करने जैसे बड़े कदम उठाती है।
- योजनाओं का विस्तार: विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं (जैसे महतारी वंदन योजना या आवास योजना) के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र या लाभ दिए जाते हैं।
3. सुशासन के स्तंभ
सुशासन तिहार के दौरान सरकार प्रशासन के इन बिंदुओं पर जोर देती है:
- ई-गवर्नेंस: सरकारी सेवाओं को डिजिटल बनाकर भ्रष्टाचार कम करना।
- समयबद्ध सेवा: नागरिकों के काम एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरे हों।
- पारदर्शिता: सरकारी निर्णयों और बजट की जानकारी आम जनता के लिए सुलभ हो।
4. आयोजन का स्वरूप
- राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन होता है।
- अटल बिहारी वाजपेयी जी के योगदान और उनके द्वारा शुरू की गई योजनाओं (जैसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना) को याद किया जाता है।
- विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनी लगाई जाती है ताकि लोग सरकारी योजनाओं को समझ सकें।
यह त्योहार केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि “अंत्योदय” (अंतिम व्यक्ति का उदय) के संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक प्रशासनिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
